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सामूदायिक सहभागिता से ही फाइलेरिया उन्मूलन संभव – डॉ. शशिकांत शंभरकर उप-संचालक,

Nagpur Media News 06 Feb, 2026
सामूदायिक सहभागिता से ही फाइलेरिया उन्मूलन संभव – डॉ. शशिकांत शंभरकर उप-संचालक,
सामुदायिक सहभागिता से ही फाइलेरिया उन्मूलन संभव – डॉ. शशिकांत शम्भरकर, उप-संचालक, सार्वजनिक आरोग्य विभाग, नागपूर संभाग, महाराष्ट्र
फाइलेरिया उन्मूलन हेतु नागपूर संभाग के तीन जिलों में 10 फरवरी से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम का शुभारंभ
चंद्रपूर, भंडारा और गढ़चिरौली जिले के 11 ब्लॉक में कुल 15,27,813 लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया जाएगा
नागपुर,
: महाराष्ट्र को फाइलेरिया मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) राउंड के शुभारंभ से पूर्व आज नागपुर जिले में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति जनमानस में कार्यक्रम के बारे में मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करना था।
10 फरवरी से नागपूर संभाग के 3 जिलों (चंद्रपूर, भंडारा और गढ़चिरौली) में शुरू होने वाले एमडीए राउंड के सफल क्रियान्वयन हेतु कुल 1527813 लाभार्थियों को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराना अपने ही सुनिश्चित करेंगे।
इस अवसर पर राज्य के उप-निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, नागपुर संभाग , डॉ. शशिकांत शम्भरकर ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है और दीर्घकालिक दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह संक्रमण प्रायः बचपन में होता है, लेकिन इसके लक्षण वयस्क अवस्था में प्रकट होते हैं। उन्होंने बताया कि यह रोग लसीका तंत्र को क्षति पहुंचाता है और समय पर रोकथाम न होने पर शरीर के अंगों में असामान्य सूजन उत्पन्न करता है, जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। इससे पीड़ित लोगों को हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा एवं दूधिया सफेद मूत्र जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया से बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय फाइलेरिया रोधी दवाओं का वार्षिक सेवन है।
डॉ. शम्भरकर ने बताया कि सामान्यतः इन दवाओं के सेवन से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते। कुछ व्यक्तियों में हल्की मितली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो यह शुभ संकेत देते हैं कि दवाएं शरीर में मौजूद फाइलेरिया परजीवियों पर प्रभाव डाल रही हैं। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल दवा भोजन के बाद चबाकर तथा डीईसी एवं आइवरमेक्टिन को पानी के साथ निगलना आवश्यक है।
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