नागपूर - हिंद महासागर के द्वीपीय देशों तक भारत की पहुंच के प्रयासों के पीछे कई सामरिक उद्देश्य काम कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की हालिया श्रीलंका व सेशेल्स की यात्र इसी सोच का एक हिस्सा रही है। भारत द्वीपीय देशों के साथ गठजोड़ उतना ही महत्वपूर्ण है जितना महाशक्तियों से। लघु द्वीपीय देशों के साथ सक्रियता बढ़ने से कई मुद्दों पर सामरिक बढ़त मिलने की उम्मीद भारत को सागरीय संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाने का मौका है हिंद महासागर के द्वीपीय देशों तक भारत की पहुंच के प्रयासों के पीछे कई सामरिक उद्देश्य काम कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की हालिया श्रीलंका व सेशेल्स की यात्र इसी सोच का एक हिस्सा रही है इस रूप में द्वीपीय कूटनीति आइलैंड डिप्लोमेसीको भारतीय विदेश नीति के स्तंभ के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सेशेल्स के एजम्पसन द्वीप में भारत अपने सैन्य अड्डे की स्थापना के अवसर खोज रहा है। साथ ही अन्य द्वीपीय देशों में आíथक कूटनीतिक संलग्नता को भी बढ़ा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रलय द्वारा इंडो पैसिफिक डिवीजन के गठन के साथ ही द्वीपीय कूटनीति को औपचारिक रूप दे दिया गया है। पिछले वर्ष भी भारत सरकार ने एक नए इंडियन ओसियन रीजन डिवीजन के गठन के साथ ही आइलैंड डिप्लोमेसी की नींव रख दी थी जिसे इस वर्ष ठोस रूप देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है।
इसके अंतर्गत श्रीलंका, मालदीव, मॉरिशस और सेशेल्स को एक साथ शामिल किया गया था और वर्ष 2019 में इस डिवीजन में विस्तार कर मेडागास्कर, कोमोरोस और रीयूनियन द्वीप को भी शामिल कर लिया था। रियूनियन द्वीप पर फ्रांस का स्वामित्व है और हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात की अध्यक्षता में आयोजित इंडियन ओसियन रिम एसोसिएशन के काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की वर्चुअल बैठक में भारत के समर्थन केसाथ फ्रांस को इस एसोसिएशन का 23वां सदस्य बनाया गया है। यह भारत के द्वीपीय सुरक्षा सागर विजन को मजबूती देने वाला कदम माना गया है।
वर्ष 2015 में भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री ने सेशेल्स की यात्र की थी और तीन दशकों में किसी भारतीय नेता द्वारा इस क्षेत्र में की गई यह पहली यात्र थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना था कि इस क्षेत्र से बेहतर संबंध भारत की सुरक्षा प्रगति के लिहाज से अहम है। लघु द्वीपीय विकासशील देश हिंद महासागर में कई एशियाई और गैर एशियाई नौसेनाओं के लॉजिस्टिक्स संस्थापनों के रूप में विकसित होते देखे गए हैं। इन लघु द्वीपीय देशों में सेना व नौसेना के अड्डे समेत समुद्री अन्वेषण खोलने की प्रवृत्ति देखी गई है।
ऐसे द्वीपीय देशों में दक्षिण एशिया में श्रीलंका व मालदीव तथा हिंद महासागर के तटीय क्षेत्रों में मेडागास्कर, कोमोरोस, रियूनियन द्वीप, सेशेल्स, जिबूती आदि शामिल हैं।फ्रांस ने रियूनियन द्वीप, अबू धाबी और जिबूती में अपने लॉजिस्टिक्स फैसिलिटी और अड्डे बना रखे हैं, जबकि चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, बांग्लादेश के चटगांव, म्यांमार के कोको द्वीप, श्रीलंका के हंबनटोटा, अफ्रीका के जिबूती और सेशेल्स में अपने अड्डे बना रखे हैं। वहीं अमेरिका ने जिबूती में अपना नौ सैनिक अड्डा बना रखा है। अफ्रीका में अमेरिका का एक मात्र स्थायी अड्डा कैंप लेमोनियर जिबूती में ही स्थित है और यह जिबूती में चीन के अड्डे से कुछ ही दूरी पर है। जापान का भी जिबूती में नौ सैनिक अड्डा है। स्टिंग ऑफपर्ल पॉलिसी के जरिये हिंद महासागर दक्षिण एशिया में नौ सैनिक अड्डों को बनाने की चीनी होड़ ने भारत की तटीय सुरक्षा को संवेदनशील बनाया है। भारत ने चीन की इस पॉलिसी को प्रति संतुलित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, वियतनाम व खाड़ी सहयोग संगठन के देशों से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की कोशिशें की है फोरम फॉर इंडिया पैसिफिक आइलैंड्स कॉपरेशन फिपिक इसी प्रकार का संगठन है जिसका गठन विशेष उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया गया है। प्रशांत महासागर क्षेत्र में समुद्री व्यापारिक मार्गो की स्वतंत्रता, समुद्री डकैती से सुरक्षा, ग्लोबल वाìमग और जलवायु परिवर्तन से द्वीपों के अस्तित्व पर बढ़ता खतरा, मत्स्य अन्य संसाधनों की होड़, प्लास्टिक प्रदूषण, तेल रिसाव से समुद्री जैवविविधता का क्षरण, प्रवाल भित्ति से बने द्वीपों पर बढ़ रहे खतरों से निपटने के दृष्टिकोण से फिपिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका गठन भारत के नेतृत्व में प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के साथ संबंधों को मजबूती देने के लिए 2014 में किया गया था। इसे भारत की आइलैंड डिप्लोमेसी के एक मजबूतउपकरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें 14 देश हैं जिसमें भारत को छोड़ सभी प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश हैं। इस संगठन के देश यद्यपि सापेक्षिक रूप से छोटे भू क्षेत्र वाले देश हैं, लेकिन इनका आíथक क्षेत्र व्यापक है। इस कारण भारत इनके साथ मिलकर महासागरीय अर्थव्यवस्था या ब्लू इकोनामी के विकास के लिए कार्य कर सकता है। भारत की प्रशांत क्षेत्र में संलग्नता बढ़ाने के लिए इसे प्रधानमंत्री की महासागरीय कूटनीति के रूप में भी देखा गया है।वर्ष 2014-15 में प्रशांत द्वीपीय देशों और भारत के मध्य वार्षकि स्तर पर कुल व्यापार 30 करोड़ डॉलर का था जिसमें से भारत का इन देशों में निर्यात 20 करोड़ डॉलर और आयात 10 करोड़ डॉलर का था। वर्ष 2014 में इस संगठन के गठन के समय भारत ने इन देशों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन व स्वच्छ ऊर्जा संवर्धन हेतु 10 लाख डॉलर की राशि वाले विशेष कोष का गठन करने और भारत में इन देशों के लिए व्यापार कार्यालय खोलने पर बल दिया था।शासनाध्यक्षों के स्तर पर दूसरे समिट में फिपिक सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुधार और सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का मजबूत समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट में फिजी में एक मेडिकल सेंटर गठित करने, वहां एक फार्मास्युटिकल प्लांट का निर्माण करने और फिजी के पर्यटन क्षेत्र में भारतीय निवेश करने की अपेक्षा को पूरा करने पर बल दिया था। भारत ने समिट में पापुआ न्यू गिनी में अवसंरचात्मक क्षेत्र को विकसित करने, सड़कों, राजमार्गो, एयरपोर्ट्स आदि बनाने में सहयोग की बात की।संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के आयोजन के दौरान 24 सितंबर, 2019 को इंडिया पैसिफिक आइलैंड्स लीडर्स मीटिंग का आयोजन न्यूयॉर्क में किया गया था। भारत के प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंधों में एक्ट ईस्ट पॉलिसी के बाद मजबूती आई है। भारत ने पैसिफिक द्वीपों में अपने विकासात्मक एजेंडे को मजबूती दी है। इस बैठक में फिपिक देशों ने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, नवीकरणीय ऊर्जा के सहयोग को बढ़ावा देने, हाल ही में गठित ग्लोबल कोलिशन ऑन डिजास्टर रिजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल होने और क्षमता निर्माण हेतु सहयोग करने पर चर्चा की।संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के आयोजन के दौरान 24 सितंबर, 2019 को इंडिया पैसिफिक आइलैंड्स लीडर्स मीटिंग का आयोजन न्यूयॉर्क में किया गया था। भारत के प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंधों में एक्ट ईस्ट पॉलिसी के बाद मजबूती आई है। भारत ने पैसिफिक द्वीपों में अपने विकासात्मक एजेंडे को मजबूती दी है। इस बैठक में फिपिक देशों ने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, नवीकरणीय ऊर्जा के सहयोग को
बढ़ावा देने, हाल ही में गठित है
वर्ष 2015 में भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री ने सेशेल्स की यात्र की थी तीन दशकों में किसी भारतीय नेता द्वारा इस क्षेत्र में की गई यह पहली यात्र थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना था कि इस क्षेत्र से बेहतर संबंध भारत की सुरक्षा और प्रगति के लिहाज से अहम है। लघु द्वीपीय विकासशील देश हिंद महासागर में कई एशियाई और गैर एशियाई नौसेनाओं के लॉजिस्टिक्स संस्थापनों के रूप में विकसित होते देखे गए हैं। इन लघु द्वीपीय देशों में सेना व नौसेना के अड्डे समेत समुद्री अन्वेषण केंद्र खोलने की प्रवृत्ति देखी गई है। ऐसे द्वीपीय देशों में दक्षिण एशिया में श्रीलंका व मालदीव तथा हिंद महासागर के तटीय क्षेत्रों में मेडागास्कर, कोमोरोस, रियूनियन द्वीप, सेशेल्स, जिबूती आदि शामिल हैं।
फ्रांस ने रियूनियन द्वीप, अबू धाबी और जिबूती में अपने लॉजिस्टिक्स फैसिलिटी और अड्डे बना रखे हैं, जबकि चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, बांग्लादेश के चटगांव, म्यांमार के कोको द्वीप, श्रीलंका के हंबनटोटा, अफ्रीका के जिबूती और सेशेल्स में अपने अड्डे बना रखे हैं। वहीं अमेरिका ने जिबूती में अपना नौ सैनिक अड्डा बना रखा है। अफ्रीका में अमेरिका का एक मात्र स्थायी अड्डा कैंप लेमोनियर जिबूती में ही स्थित है और यह जिबूती में चीन के अड्डे से कुछ ही दूरी पर है। जापान का भी जिबूती में नौ सैनिक अड्डा है। स्टिंग ऑफ पर्ल पॉलिसी के जरिये हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में नौ सैनिक अड्डों को बनाने की चीनी होड़ ने भारत की तटीय सुरक्षा को संवेदनशील बनाया है। भारत ने चीन की इस पॉलिसी को प्रति संतुलित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, वियतनाम व खाड़ी सहयोग संगठन के देशों से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की कोशिशें की हैं जिसे पूर्व विदेश सचिव ललित मानसिंह ने नेकलेस ऑफ डायमंड्स के रूप में निरूपित किया था।
भारत क्षेत्रीय संगठनों के जरिये क्षेत्रीय स्थिरता, एकीकरण व सामूहिक क्षेत्रीय विकास का लक्ष्य रखता है, परंतु कुछ क्षेत्रीय संगठनों से गठजोड़ कर भारत विशिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति करना चाहता है। फोरम फॉर इंडिया पैसिफिक आइलैंड्स कॉपरेशन (फिपिक) इसी प्रकार का संगठन है जिसका गठन विशेष उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया गया है। प्रशांत महासागर क्षेत्र में समुद्री व्यापारिक मार्गो की स्वतंत्रता, समुद्री डकैती से सुरक्षा, ग्लोबल वाìमग और जलवायु परिवर्तन से द्वीपों के अस्तित्व पर बढ़ता खतरा, मत्स्य और अन्य संसाधनों की होड़, प्लास्टिक प्रदूषण, तेल रिसाव से समुद्री जैवविविधता का क्षरण, प्रवाल भित्ति से बने द्वीपों पर बढ़ रहे खतरों से निपटने के दृष्टिकोण से फिपिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका गठन भारत के नेतृत्व में प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के साथ संबंधों को मजबूती देने के लिए 2014 में किया गया था। इसे भारत की आइलैंड डिप्लोमेसी के एक मजबूत उपकरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें 14 देश हैं जिसमें भारत को छोड़ सभी प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश हैं। इस संगठन के देश यद्यपि सापेक्षिक रूप से छोटे भू क्षेत्र वाले देश हैं, लेकिन इनका आíथक क्षेत्र व्यापक है। इस कारण भारत इनके साथ मिलकर महासागरीय अर्थव्यवस्था या ब्लू इकोनामी के विकास के लिए कार्य कर सकता है। भारत की प्रशांत क्षेत्र में संलग्नता बढ़ाने के लिए इसे प्रधानमंत्री की महासागरीय कूटनीति के रूप में भी देखा गया है।
वर्ष 2014-15 में प्रशांत द्वीपीय देशों और भारत के मध्य वार्षकि स्तर पर कुल व्यापार 30 करोड़ डॉलर का था जिसमें से भारत का इन देशों में निर्यात 20 करोड़ डॉलर और आयात 10 करोड़ डॉलर का था। वर्ष 2014 में इस संगठन के गठन के समय भारत ने इन देशों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन व स्वच्छ ऊर्जा संवर्धन हेतु 10 लाख डॉलर की राशि वाले विशेष कोष का गठन करने और भारत में इन देशों के लिए व्यापार कार्यालय खोलने पर बल दिया था।शासनाध्यक्षों के स्तर पर दूसरे समिट में फिपिक सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुधार और सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का मजबूत समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट में फिजी में एक मेडिकल सेंटर गठित करने, वहां एक फार्मास्युटिकल प्लांट का निर्माण करने और फिजी के पर्यटन क्षेत्र में भारतीय निवेश करने की अपेक्षा को पूरा करनेVतV पर बल दिया था। भारत ने समिट में पापुआ न्यू गिनी में अवसंरचात्मक क्षेत्र को विकसित करने, सड़कों, राजमार्गो, एयरपोर्ट्स आदि बनाने में सहयोग की बात की।
विदेश नीती को लेकरं कई सामाजिक उद्देश काम कर रहे है - गजेंद्र महानंद
इस रूप में द्वीपीय कूटनीति आइलैंड डिप्लोमेसीको भारतीय विदेश नीति के स्तंभ के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सेशेल्स के एजम्पसन द्वीप में भारत अपने सैन्य अड्डे की स्थापना के अवसर खोज रहा है। साथ ही अन्य द्वीपीय देशों में आíथक कूटनीतिक संलग्नता को भी बढ़ा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रलय द्वारा इंडो पैसिफिक डिवीजन के गठन के साथ ही द्वीपीय कूटनीति को औपचारिक रूप दे दिया गया है। पिछले वर्ष भी भारत सरकार ने एक नए इंडियन ओसियन रीजन डिवीजन के गठन के साथ ही आइलैंड डिप्लोमेसी की नींव रख दी थी - गजेंद्र महानंद
भारत के विदेश मंत्रलय द्वारा इंडो पैसिफिक डिवीजन के गठन के साथ ही द्वीपीय कूटनीति को औपचारिक रूप दे दिया गया है। पिछले वर्ष भी भारत सरकार ने एक नए इंडियन ओसियन रीजन डिवीजन के गठन के साथ ही आइलैंड डिप्लोमेसी की नींव रख दी थी - गजेंद्र महानंद